*मुक्त-मुक्तक : 197 - निम्न पाताल उच्च..........


निम्न पाताल उच्च 
नील गगन हो जाते ॥
घोर तम भोर के 
सूरज की किरन हो जाते ॥
भूखे चीते जो लगे 
होते मनुज के पीछे ,
वृद्ध कच्छप युवा 
द्रुत गामी हिरन हो जाते ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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