*मुक्त-मुक्तक : 196 - जिनसे कोई न..............


जिनसे कोई न साफ़ 
सुथरा हो ज़माने में ॥
वक़्त उनको लगे है 
ज़्यादा गुसलखाने में ॥
जितना देखा है 
ग़रीबों को ख़र्च में माहिर ,
उतना ही पाया
 अमीरों को धन बचाने में ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Sriram Roy said…
वाह हीरालाल जी आपके मुक्तक का जवाब नही

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