*मुक्त-मुक्तक : 193 - पहले थी जो...............

पहले थी जो ईद सी घट कर मोहर्रम हो गई ॥
शिक्षकों की दिन–ब-दिन इज्ज़त बहुत कम हो गई ॥
मानते थे पहले गुरु को लोग मानिन्दे ख़ुदा ,
अब वो श्रद्धा-आस्था जाने कहाँ गुम हो गई ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


 

Comments

Yash Babu said…
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श्रीमान जी, आपकी दृष्टि सकारात्मक है सा.. आपका आभार सा.. आपको भी गुरु पर्व पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं ..
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Bahut khub sir ji bahut umda drist kon...
धन्यवाद ! Kavi sachin gupta जी !

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