*मुक्त-मुक्तक : 192 - दुनिया की हर.............



दुनिया की हर ख़ुशी समेट ग़म को पीट-पाट ॥ 
कैसी हो ज़िंदगी को चाह दिल से चूम-चाट ॥ 
हालात हों कितने भी बरखिलाफ़ मुक़ाबिल ,
जीने से न डर मौत की कर डाल खड़ी खाट ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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