*मुक्त-मुक्तक : 191 - जिसको रब................

जिसको रब रखता उसे फ़िर कौन चखता ॥
और जिसकी आ गई हरगिज़ न बचता ॥
पर सम्हलकर ही चलें जीवन में वरना ,
हर दफ़ा ग़लती ख़ुदा न माफ़ करता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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