*मुक्त-मुक्तक : 189 - इतना कम क़ीमत..........

इतना कम क़ीमत हुआ है मेरे भइया ॥
ये करारा ख़ूबसूरत इक रुपइया ॥
एक दर्जन भर रुपये से कम कहीं भी ,
जब तलक न दो न फ़ुल मिलती है चइया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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