Sunday, April 21, 2013

व्यर्थ है सच व्यर्थ है.............



व्यर्थ है सच व्यर्थ है........
जीवन अगर यह नर्क है ?
आत्महत्या के लिए 
इससे बड़ा क्या तर्क है ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...