Thursday, April 25, 2013

हो कितनी खूबसूरत.................


हो कितनी ख़ूबसूरत 
जस परी या अप्सरा ॥
न पा पाती है 
बीवी का तवायफ़ ओहदा ॥
ज़माना इनके मानी में
 करे कुछ फ़र्क़ यों ,
कि  इक मस्जिद हो जैसे 
दूसरी हो मैक़दा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...