ज़िंदगी उसकी अगर..........

ज़िंदगी  
उसकी अगर रंगीन है ,
इंतिज़ारे मर्ग 
क्यों उसको रहे ?
चश्मा-ए-शाही 
जिसे कहते हैं सब,
फ़िर वो रेगिस्तान 
ख़ुद को क्यों कहे ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति   

Comments

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 262 - पागल सरीखा

विवाह अभिनंदन पत्र

मुक्त-ग़ज़ल : 264 - पेचोख़म