Thursday, April 18, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 169 - अपना सब जोड़ना है...........


अपना सब जोड़ना है 
जो भी कुछ है टूटा सा ॥
उसको हर हाल मनाना है 
जो है रूठा सा ॥
अपनी ख़ातिर तो जैसा हूँ
 मैं ठीक हूँ सचमुच ,
मुझको बनना है
 किसी के लिए अनूठा सा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

मुक्तक : 583 - हे शिव जो जग में है

हे शिव जो जग में है अशिव तुरत निवार दो ।। परिव्याप्त मलिन तत्व गंग से निखार दो ।। स्वर्गिक बना दो पूर्वकाल सी धरा पुनः , या खो...