*मुक्त-मुक्तक : 169 - अपना सब जोड़ना है...........


अपना सब जोड़ना है 
जो भी कुछ है टूटा सा ॥
उसको हर हाल मनाना है 
जो है रूठा सा ॥
अपनी ख़ातिर तो जैसा हूँ
 मैं ठीक हूँ सचमुच ,
मुझको बनना है
 किसी के लिए अनूठा सा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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