Saturday, April 27, 2013

जंगल का हो.................


जंगल का हो या शहर का 
राजा तो है राजा ,
जिसपे भी वो चाहेगा 
करेगा सवारियाँ ॥  
इस बात से क्या लेना उसे
 किसको क्या तक्लीफ़ ,
अपने भले को 
वो करेगा सब बुराइयाँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

No comments:

मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...