83 : मुक्त-ग़ज़ल - किसने बख़्शा है................


किसने बख़्शा है किसने छोड़ा है ?
हर किसी ने तो दिल को तोड़ा है ॥
सिर्फ़ दुश्मन ही कब तरक़्क़ी में ,
दोस्त भी आज एक रोड़ा है ॥
सिर्फ़ मतलब के लिए आपस में ,
ख़ुद को लोगों ने सबसे जोड़ा है ॥
ग़ैर के वास्ते जो है घोंघा ,
ख़ुद की ख़ातिर अरब का घोड़ा है ॥
सबको अपनी ही हिफ़ाज़त की पड़ी ,
मुल्क़ बस फ़ौज पे रख छोड़ा है ॥
अपने माँ बाप से शादी के बाद ,
प्यार लड़कों में बचता थोड़ा है ॥
एक मुद्दत से भरा बैठा है ,
छेड़ मत पक चुका वो फोड़ा है ॥
हाल गन्ने का वो करेगा क्या ,
जिसने बालू को भी निचोड़ा है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Sriram Roy said…
बहुत सुन्दर तरीके से आपने बिचारो को व्यक्त किया है ..

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