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Tuesday, April 2, 2013

82 : मुक्त-ग़ज़ल - अब न रोऊंगा कभी..............


अब न रोऊंगा कभी न खिलखिलाऊंगा कभी ॥
दर्दो ग़म हो या ख़ुशी चुपचाप उठाऊंगा सभी ॥
अपनी सूरत से बुरी सूरत न देखी है मगर ,
आईने हरगिज़ न मैं घर के हटाऊंगा सभी ॥
 तूने कर ली ग़ैर से शादी न डर आशिक़ हूँ मैं ,
तेरी ख़्वाहिश है तो तेरे ख़त जलाऊंगा सभी ॥
हूँ बहुत दुश्नाम अब सरनाम होने के लिए ,
दाग़ माथे के मैं मिटकर भी मिटाऊंगा सभी ॥
छोड़ दे तू पूछना मैं वक़्त आने पर खुद ही ,
कुछ न छोडूंगा वो बातें भी बताऊंगा सभी ॥
तूने माना है तहेदिल से मुझे उस्ताद तो ,
मैं भी जो कुछ जानता हूँ वो सिखाऊंगा सभी ॥
तू न बेजा फ़ायदा आज़ादियों का ले अगर ,
बंदिशें तुझ पर लगीं फ़ौरन हटाऊंगा सभी ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

10 comments:

sriram said...

so sweet and nice..........

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! sriram जी !

bholanath navgeetkar said...

बहुत सुन्दर अभिव्यति दी है प्रजापति जी ...बधाई

bholanath navgeetkar said...
This comment has been removed by a blog administrator.
डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! bholanath navgeetkar जी !

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...
This comment has been removed by the author.
सरिता भाटिया said...

वाह खुबसूरत गजल

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! सरिता भाटिया जी !

Shiv Raj Sharma said...

बेहतेरीन सर जी

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! Shiv Raj Sharma जी !