*मुक्त-मुक्तक : 184 - अपने ख़स्ता..........


अपने ख़स्ता हाल पे 
औरों के धन से चिढ़ हो ॥
देख देख अपना बूढ़ापन 
यौवन से चिढ़ हो ॥
और यही मन 
और भी दुःख देता है जब अपना ,
रोग असाध्य हो 
तो स्वस्थों के जीवन से चिढ़ हो ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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