*मुक्त-मुक्तक : 182 - जिन्हें सपनों में.............


जिन्हें सपनों में भी न पा सकें 
उन पर ही मरते हैं ॥
न जाने कैसी कैसी 
कल्पनाएँ लोग करते हैं ?
चकोरों को किसी सूरत में 
चन्दा मिल नहीं सकता ,
बख़ूबी जानते हैं फ़िर भी 
अपलक उसको तकते हैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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धन्यवाद ! Lekhika 'Pari M Shlok' जी !

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