*मुक्त-मुक्तक : 178 - पेटू को तीखी.............


पेटू को तीखी चटनी औ 
अचार का चस्का ॥
अक्सर ही डॉक्टर को हो
 बीमार का चस्का ॥
जैसे कि जुआरी को 
जुआ खेलने की लत ,
दिन रात मुझको है तेरे 
दीदार का चस्का ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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