*मुक्त-मुक्तक : 176 - मेरी जो मोहब्बत............

मेरी जो मोहब्बत का है 
क़िस्सा यों समझ ले ॥ 
होते ही पैदा मर गया 
बच्चा यों समझ ले ॥ 
ताउम्र रहा 
मुब्तलाए इश्क़ जबकि हाँ ,
खाता रहा पै दर पै मैं 
गच्चा यों समझ ले ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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