*मुक्त-मुक्तक :175 - है हक़ीक़त में..............

है हक़ीक़त में ज़िंदगानी क्या ?
सिर्फ़ इक बुलबुला है पानी का ॥
फ़िर भी कितनों को है ग़ुरूर यहाँ ,
दौलतो-शोहरतो-जवानी का ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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