*मुक्त-मुक्तक : 173 - ट्रेन की भीड़..................

ट्रेन की भीड़-भाड़ में धँसे गसा-पस में ॥

होके बेखौफ़ ज़माने से टैक्सी बस में ॥ 
आप क्या जानिए कि ऐसे भी ,
बनते हैं आशिक़ो महबूब ख़ूब आपस में ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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