*मुक्त-मुक्तक : 172 - आव देखा न ताव............

आव देखा न ताव उनका झट चुनाव किया ॥
बाद मुद्दत के मगर प्रेम का प्रस्ताव किया ॥
तब तलक उनके कहीं और लड़ चुके थे नयन ,
अपना ख़त ख़ुद ही फाड़ राह में फैलाव किया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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