*मुक्त-मुक्तक : 170 - खुल के दीदार न............


खुल के दीदार न दो
 चाहे तुम झरोखे से ॥
हम तुम्हें देख ही लेंगे 
कहीं भी धोख़े से ॥
सब ही लगते हैं एक जैसे 
कुछ भी ख़ास नहीं ,
तुम ही दिखते हो 
चोखे चोखे और अनोखे से ॥
डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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