*मुक्त-मुक्तक : 166 - सब रामत्व विहीन.........


सब रामत्व विहीन 
मारने रावण आए ॥
रक्त बीज सा वह क्यों न 
पुनि पुनि जी जाए ॥
सचमुच हो जो 
दशआनन का वध अभिलाषी ,
सर्व प्रथम वह 
स्वयं को  पूरा राम बनाए ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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