*मुक्त-मुक्तक : 99 - कुछ होते रुपये.............



कुछ होते रुपये होता कुछ दिमाग़ मेरे पास ॥
जिसको बुलाता आता वही भाग मेरे पास ॥
हो जाते झपकते ही पलक मेरे सारे काम ,
होता जो अलादीन का चिराग़ मेरे पास ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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