*मुक्त-मुक्तक : 163 - मुफ़लिसी मेरी............


मुफ़लिसी मेरी मिटी मेरी ग़रीबी कम हुई ॥
सच कहूँ तो जबसे मेरी बदनसीबी कम हुई ॥
दोस्त रिश्तेदार मुझसे पेश यों आने लगे ,
मुझको लगता है मेरी उनसे क़रीबी कम हुई ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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