*मुक्त-मुक्तक : 158 - छूने से तेरा..............


छूने से तेरा बिल्कुल छुइमुई सा सिमट जाना ॥ 

इसरार पे पेड़ों की बेलों सा लिपट जाना ॥

ये जानलेवा तेरी इक इक अदा पे मुझको ,

शम्मा पे पतंगों सा लगता है निपट जाना ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे