*मुक्त-मुक्तक : 157 - कहने को जमाने में...............


कहने को जमाने में मेरे दोस्त हैं हज़ार ॥ 

दो चार ही निकलेंगे शायद उनमें गमगुसार ॥ 
मतलब को कुछ तो गुड़ में मक्खियों से चिपकते , 
हो जाते हैं तक्लीफ़ोमुसीबत में कुछ फरार ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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