Saturday, April 13, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 156 - हर वक़्त जेहनोदिल में...............



हर वक़्त जेहनोदिल में इक ही सवाल था ॥
क्यों बर्फ़ का सुलगते शोलों सा हाल था  ?
देखा कभी न जिसको दुश्मन पे भी खफ़ा ,
अपनों पे आज वो ही ग़ुस्से से लाल था ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...