*मुक्त-मुक्तक : 156 A - ज्यों नदी कोई.............


ज्यों नदी कोई समुंदर से 
जा के मिलती है ॥
ख़ल्वतों में वो मुझसे 
ऐसे आ के मिलती है ॥
और दुनिया के आगे 
एक अजनबी की तरह ,
दूर से ही नज़र
 झुका झुका के मिलती है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Sriram Roy said…
वाह !अति सुन्दर ......

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