*मुक्त-मुक्तक : 153 - ये शहर क्या है................


ये शहर क्या है दुनिया को
कर डालूँ फ़तह मैं ॥
इक बार फ़क़त दिल में 
तेरे पालूँ जगह मैं ॥
बन जाऊँ तेरा जिन्न 
तुझको आक़ा बना लूँ ,
हर हुक़्म की तामील 
करूँ ठीक तरह मैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

expression said…
बहुत सुन्दर पंक्तियाँ....
सादर
अनु
धन्यवाद ! expression अनुलता जी !

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