Friday, April 12, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 152 - रहा करते हैं तनहाई...............


रहा करते हैं तनहाई में 
हर इक छोड़ दी महफ़िल ॥
नशे में अब फिरा करते हैं 
गलियों में हुए गाफ़िल ॥
कि जबसे हो गए नाकामयाब
 इक अपने मक़सद में ,
तभी से मौत को अपनी 
मुक़र्रर की नई मंज़िल ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...