*मुक्त-मुक्तक : 154 - अपनी पूरी ...............




अपनी पूरी हरेक 

चुन के रज़ा करते हैं ॥ 


किए हैं काम कुछ ऐसे कि

 मज़ा करते हैं ॥ 


सख़्त बचते हैं 

बुराई से बुरे लोगों से ,


जो भी करते हैं 

बहुत ठोक-बजा करते हैं ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Pratibha Verma said…
वाह बात है।।
पधारें "आँसुओं के मोती"
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

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