151 - क़ाबिल ही नहीं................


क़ाबिल ही नहीं होते 
जमाने में क़ामयाब ,
नालायकों ने भी 
छुआ है आसमान को ॥
अंधों के हाथ भी तो 
बटेरें लगें यहाँ ,
पाते हैं कितने भुस की जगह 
जाफ़रान को ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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धन्यवाद ! धीरेन्द्र अस्थाना जी !

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