*मुक्त-मुक्तक ; 150 - ख्वाबों से खुद............


ख़्वाबों से ख़ुद को भरसक हम 
दूर कर रहे हैं ॥
दिल पर हम अपने क़ाबू 
भरपूर कर रहे हैं ॥
क्या चाहते हैं हम ख़ुद 
हमको पता नहीं है ,
जो कुछ भी मिल रहा है 
मंजूर कर रहे हैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

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