*मुक्त-मुक्तक : 149 - न लिखें मौलिक...............


ना लिखें मौलिक 
न कुछ रचनात्मक रोचक ॥
जिनको देखो बन रहे 
गंभीर आलोचक ॥
दूसरों को तो दिखाते 
फिरते आईने ,
ख़ुद की गौरिल्लाओं सी 
सूरत करे भौचक ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे