*मुक्त-मुक्तक : 148 - जब भी कहा...................


जब भी कहा था तुमने 
दीदार कराया था ॥
जो भी कहा वो मेरी 
आँखों को दिखाया था ॥
मेरी हर इक तमन्ना के
 क़द्रदान तुमने ,
मुझसे न कुछ भी चाहा 
सब अपना लुटाया था ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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