Wednesday, April 10, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 147 - जबकि जी भर...............


जबकि जी भर के 
सताया है रुलाया है मुझे ॥
फ़िर भी लगता है 
मोहब्बत ने बनाया है मुझे ॥
उसको पाने को ही 
सिफ़र से हुआ था मैं हज़ार ,
उसके न मिलने ने 
मिट्टी में मिलाया है मुझे ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...