*मुक्त-मुक्तक : 146 - उसका हर इक.................


उसका हर इक दुकान में 
खाता उधार रख ॥
जो अपना पेट 
पाल न सकता हो मार रख ॥
होती नहीं है उसकी क़द्र 
घर में न बाहर ,
या रब किसी को भी न तू 
बेरोज़गार रख ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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