Monday, April 8, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 141- जैसे कि तेरी...................


जैसे कि तेरी फ़ितरत है 
सिर्फ़ दग़ा करना ॥
मेरी है वफ़ा सिर्फ़ वफ़ा 
सिर्फ़ वफ़ा करना ॥
शामिल है तेरी ख़ूबी में 
डसना साँप अगर ,
मैं चाराग़र हूँ मेरा है 
फर्ज़ दवा करना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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हे शिव जो जग में है अशिव तुरत निवार दो ।। परिव्याप्त मलिन तत्व गंग से निखार दो ।। स्वर्गिक बना दो पूर्वकाल सी धरा पुनः , या खो...