*मुक्त-मुक्तक : 139 - भीगी बिल्ली थी................


भीगी बिल्ली थी खौफ़नाक शेरनी अब है ॥
कुंद चाकू थी धारदार लेखनी अब है ॥
 उसने बदली है अपनी शख़्सियत कुछ इस तरह ,
पहले जो बेअसर थी पुरअसर बनी अब है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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