Sunday, April 7, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 138 - कितने मुर्दों में...................



कितने मुर्दों में नई 
फूँक जान देते हैं ?
कितने मुफ़लिस को जमा 
धन का दान देते हैं ?
कितने भूखों को 
दिया करते हैं दाना पानी ?
कितने बेघर को 
ठिकानो मकान देने हैं ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...