*मुक्त-मुक्तक : 137 - है अभी भी........................


है अभी भी अपना पर 
अपना नहीं लगता ॥
जाने क्यों अब अपना घर 
अपना नहीं लगता ॥
जिसमें मैं पैदा हुआ 
जिसमें गुज़ारी ज़िंद ,
अब वही प्यारा शहर 
अपना नहीं लगता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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