*मुक्त-मुक्तक : 135 - उससे बढ़कर....................



उससे बढ़कर और कोई स्यात था ॥
इतना वो संसार में विख्यात था ॥
आज परछाईं भी उससे है अलग ,
शत्रु भी कल तक कि जिसके साथ था ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 


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