*मुक्त-मुक्तक : 95 - हर वक़्त अपने..............

हर वक़्त अपने साथ रखूँगा शराब को ॥
चूमूँगा-सूँघूँगा.......न चखूँगा शराब को ॥
पी-पी के ख़ुद ही अपना जिगर फूँका है मैंने ,
मैं हूँ ग़लत...ग़लत न कहूँगा शराब को ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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