*मुक्त-मुक्तक : 94 - इस जमाने में हैं............


इस ज़माने में हैं 
कितने ही खड़े लोग पड़े ॥
दिखते बाहर से 
तर-ओ-ताज़ा औ अंदर से सड़े ॥
क़ीमती सूट बूट 
बेश क़ीमती टोपी ,
क़द दरख़्त-ए-खजूर 
दिल हैं चूहों जितने बड़े ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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