*मुक्त-मुक्तक : 91 - हवा को जैसे...............


हवा को जैसे कि 
मुट्ठी में क़ैद कर लेना ,
पहाड़ ऊँचे उठा 
अपने सर पे धर लेना ,
गुलाब सूँघने सा 
मुझको सचमुच आसाँ है -
लगे है नामुमकिन 
उसके दिल को हर लेना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

कहानी : एक नास्तिक की तीर्थ यात्रा