*मुक्त-मुक्तक : 90 - तुम खफ़ा भी..................


तुम खफ़ा भी रहो तो 
मुस्कुराती लगती हो ॥

गालियां भी बको तो 
गुनगुनाती लगती हो ॥ 

ये नज़रिया है मेरा 
तुमको देखने का जो तुम ,

ठूँठ हो ठूँठ मगर 
लहलहाती लगती हो ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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