*मुक्त-मुक्तक : 86 - पाया है इतना.............


पाया है इतना ऊँचा उन्होने मक़ाम यार ॥
बौनीं हैं उनके आगे मंज़िलें तमाम यार ॥
उनको न चाँद तारे न सूरज हैं लाज़मी ,
हैं उनपे रोशनी के इतने इंतज़ाम यार ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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