*मुक्त-मुक्तक : 82 - हथ तोड़ दे............

हथ तोड़ दे मत हथ छोड़ मगर ॥
मुँह तोड़ दे मत मुँह मोड़ मगर ॥
बिन तेरे मेरी दुनिया दोज़ख़ ,
जाँ ले ले तू मत दिल तोड़ मगर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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