79 : मुक्त-ग़ज़ल - औरों पर निर्भर............


औरों पर निर्भर बिस्तर पर जीकर भला करेंगे क्या ?
ठीक नहीं जब होना है फिर पीकर दवा करेंगे क्या ?
दिल में दर्द का आलम है संगीत फड़कता बजे उधर ,
कानों में रुई न ठूँसें तो सुनकर चिढ़ा करेंगे क्या ?
लाख दुहाई पर हो जाएँ माना ख़ूब मेहरबाँ भी ,
यारों की मिन्नतो ख़ुशामद लेकर दया करेंगे क्या ?
नाकामों के आगे अपनी क़ामयाबियों का चर्चा ,
हरे धुएँ में घी डालेंगे फूँ फूँ हवा करेंगे क्या ?
बरसों बीत गए तुम जैसे दूजों का रस्ता देखे ,
अब तस्वीरों में ही ऐसे इंसाँ मिला करेंगे क्या ?
पहले जब तक चुका न दोगे अगले कैसे पाओगे ,
साहूकार हीरा से फ़िर भी क़र्ज़े दिया करेंगे क्या ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर.....होली की शुभकामनाएं ...
पधारें कैसे खेलूं तुम बिन होली पिया...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

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