77 : मुक्त-ग़ज़ल - ख़बरदार होली के...............


ख़बरदार होली के रँग में भंग मिला न जाये कोई ॥
रंग से नफ़रत करने वालों रंग लगा न जाये कोई ॥
जिसको रंग न हो पसंद मत उसको रंग तैयार करो ,
वरना सुर्ख़ रंग के बदले ख़ून बहा न जाये कोई ॥
होली में बदले भी कितने लोग चुकाया करते हैं ,
होशियार पर्दे होली के बैर निभा न जाये कोई ॥
क़सम उठाकर घर से निकलो कोई लाख दुहाई दे ,
अगर नहीं पीना है तुमको भंग पिला न जाये कोई ॥
जोबन के अस्ताने तेरी उम्र क़दम रखने को है ,
हुरियारा हीरा ’’ के जैसा अंग लगा न जाये कोई ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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